वर्ड्प्रेस पर मेरे ब्लाग चल नहीं पाते, पता नहीं क्यों ? शायद मेरा अनाड़ीपन ही हो । मनुष्य की नाड़ी पर पकड़ बना लेने से ही कोई सर्वज्ञ तो नहीं हो जाता । चलो एक शुरुआत फ़िर सही, प्रतिष्ठित भले हो किंतु वर्डप्रेस सुगम्य नहीं लगता, जाने क्यों ? आज बच्चों का वालपेपर संग्रह देख रहा कि ….

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सहसा इन दोनों छवियों पर निगाह टिक गयी । देखा, कई कई बार देखा, देखता ही रहा । लग रहा था कि ये चित्र कोई संदेश दे रहे हैं, किंतु जैसे किसी अबूझ भाषा में ! यह ममता, वात्सल्य की श्रेणी से परे की कोई अभिव्यक्ति है । दोनों शिशुओं के चेहरे से झलकता अपार संतोष, जैसे पूरी दुनिया जकड़ रखी हो । याकि उनके सुरक्षित होने के भाव को मैं पढ़ नहीं पा रहा हूँ, दोनों ही माँ के गले को जैसे अपने अस्तित्व का संबल पाकर झूम रहे हों । मैं तो इस रिश्ते को कोई शब्द ही नहीं दे पा रहा हूँ । भला, आप क्या कहते हैं ? बताइयेगा अवश्य ! इस नैसर्गिक भाव को एक शब्द की आवश्यकता है ।