हम अपने गिरेबाँ में झाँक चुके, अब आपकी बारी है ! बहुधा एक अल्प पढ़ालिखा आदमी बल्कि कभी कभी अनपढ़ भी, किसी डाक्टर को यह कह कर ख़ारिज़ कर देते हैं कि ‘  डाक्टर समझ में नहीं आये । ‘ मेरे कानों तक भी बात आती है तो मन में यही एक प्रश्न उठता है कि ‘ समझ में आने ‘  का मापदंड क्या रखा होगा इन पारखियों ने ! कोई भी इस कसौटी को आज तक संतोषप्रद ढंग से परिभाषित नहीं सका । फिर यह टिप्पणी क्यों और कैसे ? आप अपनी अपेक्षायें रेखांकित भले न कर पायें हों । मैं चिकित्सक बिरादरी की ओर से कुछ  उनकी अपेक्षायें यहाँ रखना चाहूँगा ..

क्या चाहता है एक डाक्टर अपने मरीज़ से …. acnext_e0 यदि सिलसिलेवार  ढंग से कहें तो, या चलिये प्रश्नवाचक तरीका ज़्यादा सुगम लग रहा है  । वही रहने देते हैं, क्या आप …. 

 कपया स्वयं से पूछें अपनी बारी की प्रतीक्षा एवं धीरज में विश्वास रखते हैं

 कपया स्वयं से पूछें अपने को डाक्टर के यहाँ जाकर अतिविशिष्ट व्यक्ति तो नहीं मानते

 कपया स्वयं से पूछें आप असंगत एवं तर्कहीन प्रश्न करने से परहेज़ रखते हैं

 कपया स्वयं से पूछें अपने साथ भीड़ लेकर डाक्टर के यहाँ मजमा तो नहीं लगाते

 कपया स्वयं से पूछें अपने नियत समय और तिथि पर सलाह हेतु उपस्थित होते हैं

कपया स्वयं से पूछें अपने स्वास्थ्य से ज़्यादा आपका ध्यान तात्कालिक मुद्दों पर तो नहीं रहता

कपया स्वयं से पूछें अपनी यथासंभव मेडिकल जानकारी से अगले को प्रभावित करने का प्रयास तो नहीं करते

कपया स्वयं से पूछें अपने डाक्टर को नियत समय पर फ़ीस देने से तो नहीं कतराते

कपया स्वयं से पूछें अपनी तक़लीफ़ों की डायग्नोसिस स्वयं ही कर डाक्टर से पुष्टि तो नहीं चाहते

कपया स्वयं से पूछें अपना ईलाज़ आप अपनी ही समझ से करके डाक्टर के लिये मुसीबत  तो नहीं खड़ी करते

कपया स्वयं से पूछें अपने डाक्टर के सम्मुख अन्य डाक्टरों, उनके द्वारा दी गयी दवाओं एवं करवाये गये टेस्ट की आलोचना तो नहीं करते

यदि आप इन सभी प्रश्नों पर खरे उतरते हों, तो बेशक आपको किसी भी डाक्टर को समझ न पाने का फ़तवा देने का हक़ है

डाक्टर बनाम मरीज़ - अमर

आपकी बातें ज़ायज़ हो सकती हैं, किंतु आप डाक्टर का कार्य आसान कर सकते हैं यदि आप अपना पूरा हाल किसी काग़ज़ पर लिख कर ले जायें ।  ठीक से न सुने जाने की शिकायत और दोनों के ही समय की बचत होगी । आपकी तक़लीफ़ आपके जीवन की एक घटना है, किंतु यह एक डाक्टर के जीवन की रोज़मर्रा की बात है, अतएव उससे नाटकीय होकर तत्पर होजाने की अपेक्षा करना अनुचित है । यदि आप सोचते हों कि एक बार दी गयी फ़ीस ही आपके आजीवन स्वास्थ्य बीमा की रकम है, तो यह ज़्यादती होगी । तात्कालिक एवं सामयिक मुद्दे, मसलन ‘ आफ़िस से छुट्टी लेकर आयें हैं , बस पकड़नी है, पति लंच पर आते होंगे ‘ इत्यादि का दबाव डाक्टर को विचलित करता है, इनसे बचें । आपके साथ की भीड़ एक संतुलित निर्णय लेने  में बाधक हो सकती है, साथ ही अन्य रोगियों की असुविधा का कारण भी बनती है, आप ऎसा कदापि नहीं चाहेंगे । दूसरे डाक्टरों की आलोचना कर यदि आप अपने चिकित्सक के कृपापात्र बनने की आकांक्षा रखते हों, तो यह हास्यास्पद है । अपनी शंकायें निर्मूल करें ।

डाक्टर आपकी सहायता को तत्पर है, किंतु आपका व्यवहार, विश्वास एवं धैर्य ही उसे बेहतर सेवा की प्रेरणा देता है । इनको अपना कर देखें ..