डा0 अमर कुमार के शब्द हैं: ”यह ठीक है, कि आप बाहर आज़ाद घूम रहे हैं, लेकिन मियाँ जी जूती भी पहना करते हैं । जब तक आप अपने बीमार मन का इलाज़ नहीं करवा लेते, यह जूती यदा कदा प्रयोग कर सकते हैं ! सिर की अदला बदली होती रहेगी, पर उसकी नौबत न ही आयेगी । आपसे ज़्यादा छँटॆ हुये मेरे लौंडे लखनऊ में घूम रहे हैं, जो मेरे दिमाग घूम जाने पर मुझे उपकृत करने को उत्सुक हैं, प्रजापति.. तुम्हारा आई.पी. बैन कर रहा हूँ ! इतने से सँतोष न हो, तो साइट लाक करवा दूँ ? होश में रहो.. तिरँगे को अपमानित करके कालर ऊँची करने जैसे जनखे भ्रम से अब दूर भी हो जाओ । इडियट !!!!!!!”

इतना सब पढ़ने के बाद भी आपको आपत्ति है तो आप ही बतायें यह कहाँ तक सही है?

Originally posted as a comment by Vinay Prajapati on TECH PREVUE । तकनीक दृष्टा using Disqus.